Monday, 30 December 2013

बंदे मातरम चिल्लाना कोई राष्टप्रेम का प्रमाणपत्र नहीं!

मित्रो!... बंदे मातरम चिल्लाना कोई राष्टप्रेम का प्रमाणपत्र नहीं!..है वन्दे मातरम चिल्लाने वाला गद्दार भी हो सकता है और न चिल्लाने वाला राष्ट के प्रति कर्तव्य पालन के प्रति मुस्तैद!...हमें असल मकसद से मतलब रखना चाहिए!....आर0एस0एस0 का बँडेमातरम के नाम पर निसमझ हिंदू नौजवानों को भड़काना असल में देश तोड़क चाल का हिस्सा है!....हम सब को ऐसी चालों से सावधान रहना चाहियों!....भारतीय जनता पार्टी की माँ आर0एस0एस0 जो 1925 से बनी है और उस समय सारा देश वनडेमातरम बोल रहा था और जो बँडेमातरम नही भी बोलते थे वह भी उसी काम में अपनी जान लूटा रहे थे , जेल जेया रहे थे, अंग्रेज पुलिस की लाठियाँ खा रहे थे तब यह बंदे मातरम बोलने पर ज़ोर देने वाले आर0एस0एस0 के नेता और संस्थापक सब के सब सारी बातों से अनभीगी बन सुबह होते ही आर0एस0एस0 का झंडा गाड़ कर ध्वज प्रणाम करने में मस्त रहते थे!....कोई उस समय इन में से बँडेमातरम का नारा बुलंद करने को आयेज क्यों नहीं आया!...ले दे कर इन लोगों के पास एक नाम बचाता है विनायक दामोदर सावरकर का जो इनके प्रेरणा श्रोत हैं जिन्हें यह वीर सावरकर कहते हैं!... वह अँग्रेज़ों से माई बाप कह कर लिखित माफी माँग कर उनके लिए काम करने का वायदा कर जेल से च्छुटे थे!...और इस वात के लिए मैं उनकियरीफ़ त करता हूँ की जो वायदा कर के अँग्रेज़ों से छ्छूते थे उसे पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ अक्षरश: निभाया!...भले ही देश के तीन टुकड़े हो गये पर दिया हुआ वचन टुकड़े -टुकड़े नहीं होने दिया!...
अब इन्हे राष्ट्र भक्त कहो या राष्ट्र द्रोही यह मैं भारत के नौजवानों पर छ्चोड़ता हूँ!....

सारे लिखित दस्तावेज़ी सबूत हैं कोई लफ़फाज़ी नहीं कर रहा आर0एस0एस0 वालों की तरह!...इतिहास को खंगाल कर तो देखो भाई!...दूध का ढूढ़ पानी का पानी हो जायगा!....जिन्ना द्वारा मुस्लिम लीग बना कर अलग पाकिस्तान माँगने से तीन वर्ष पहले ही अँग्रेज़ों से किए वायदे को पूरा करने के लिए सावरकर ने द्विराशट्रवाद के सिद्धांत को प्रतिपादित कर हिंदू मुसलमान एक साथ नहीं रह सकते इस के लिए अलग अलग दो राष्ट्र हिंदू और मुसलमानों के होना ही चाहिए कह कर रास्ता बनाना ह्नड़ू मुस्लिम एकता को तोड़ने का तैयार कर दिया था जिसका उस समय मतलब था आज़ादी के आंदोलन की कमर तोड़ने उसकी हत्या करने जैसा और अग्रेज़ों को देश पर अपना साम्राज्य कायम रखने में सहयोग देने वाला था इस से कौन इनकार कर सकता है!...क्या हिंदू मुसलमान होना इतनी घ्रना का कारण है की हम एक साथ एक मुल्क में रह ही नहीं सकते!...फिर हिंदुओं के लिए भी इस आर0एस0एस या भाजपाई दर्शन में जगह कहाँ है यदि ऐसा होता की हिंदूओं के ही खैर ख्वाऐं ह तो फिर यह च्छुआ छ्छूट ऊँच नीच का ड्रामा क्यों होता!...कौन हिंदू है!...कोई ब्राह्मण है कोई बनियान है कोई राजपूत हैं कोई शूद्र है कोई अहीर है कोई गडरिया है कोई नाई है कोई धोबी है हिंदू कौन है!...इस लिए मेरे देश के आती उत्साही इतिहास से अनभिगी नौजवानों घ्रना की राजान्ीती को समझो और उससे वाज़ आओ!...मैनपुरी के शायर इकबाल जी की पंक्तिया आज बरबस याद आतीं हैं!... खून-ए-इंसान की प्यासी जो नज़र आतीं हो!... तोड़ दो मंदिरो मस्जिद की वह सब दीवारें!.. हम चमन में हरगिज़ नहीं बसने देंगे!... जो उठाते हों यहाँ नफ़रतों की दीवारें!... धन्यवाद मित्रो!... आपका महत्वाकांक्षी!... लाल देवेन्द्र सिंह चौहान

भारतीय संविधान की परिकल्पना लोकतंत्र

भारतीय संविधान की परिकल्पना लोकतंत्र और
मानवाधिकारों की सुरक्षा रही है. भारतीय
संविधान के अनुच्छेद-14 के तहत
सभी को समानता का अधिकार दिया गया है.
अनुच्छेद-15 शैक्षणिक संस्थानों में
सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार देता है. अनुच्छेद-16
सभी नागरिकों को सरकारी नौकरियों में
समानता का अधिकार देता है. इन
तीनों अनुच्छेदों को आधार पर
किसी भी नागरिक के साथ उसके धर्म, नस्ल, लिंग,
जाति, जन्म अथवा निवास स्थान के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता है.
अनुच्छेद-25 के तहत सभी लोगों को अपने धर्म और
विश्वास को मानने की आजादी दी गई है. यह बेहद
ही खुशी की बात है कि संविधान के तहत कानून के
अलावा भारतीय समाज
सभी लोगों को बराबरी का दर्जा देने में यकीन करता है. इन सबके बावजूद, भारत सरकार ने कॉन्स्टीट्यूशन
(अनुसूचित जाति) ऑर्डर, 1950 के पैरा-3 में एक शर्त
रखी है कि अनुच्छेद-341 के तहत अनुसूचित
जाति को मिलने वाली सुविधाएं सिर्फ हिंदू,
सिख या नव-बौद्ध (धर्मांतरित)
को ही दिया जाएगा. इस धार्मिक भेदभाव के कारण मुस्लिम और ईसाई दलित सरकारी शिक्षण
संस्थाओं, सरकारी नौकरियों और अन्य मामलों में
इस अधिकार से वंचित हैं, जबकि हिंदू, सिख या नव-
बौद्ध को मानने वाले 1950 से अभी तक इनका लाभ
उठा रहे हैं. मुस्लिम और ईसाई दलितों के लिए सबसे अधिक दुख
की बात यह है कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में
लोकसभा अथवा विधानसभा की सीट अनुसूचित
जाति के लिए आरक्षित कर दी गई हैं. इस कारण
मुस्लिम और ईसाई दलित उन क्षेत्रों में चुनाव लड़ने
के अधिकार से वंचित हैं. वर्ष 1950 से अभी तक लोकसभा के लिए 15 बार
चुनाव हो चुके हैं, लगभग 540 सीट मुस्लिम बहुल
इलाकों में आरक्षित रखे गए और इन पर मुस्लिम
या ईसाई दलित जीत हासिल कर सकते थे. इस
नुकसान का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है
कि अबी तक 450 मुस्लिम सदस्य लोकसभा के लिए चुने गए और उन्हें 540 सीटों से वंचित रखा गया.
ठीक इसी तरह, जो अधिकार अनुसूचित
जाति को दिए गए हैं, अगर उन सबसे मुस्लिम और
ईसाई दलितों को वंचित नहीं रखा गया होता,
तो मुस्लिम वर्ष 1952 से अभी तक 3000 और अधिक
विधानसभा सीटें जीत सकते थे. लोकसभा और विधानसभा में इतनी बड़ी संख्या में मुस्लिम और
ईसाई दलितों के प्रतिनिधित्व पर पाबंदी लगाने से
मुस्लिमों को विकास के विभिन्न क्षेत्रों से वंचित
रखा गया. राजनीतिक संस्थाओं में
मुस्लिमों ईसाइयों का कम प्रतिनिधित्व होने के
कारण अन्य क्षेत्रों में भी उनके साथ भेदभाव को बढ़ावा मिला. इस पैराग्राफ का तात्पर्य यह है कि यदि कोई हिंदू,
सिख या बौद्ध आनुसूचित जाति का व्यक्ति धर्म
परिवर्तित कर इस्लाम या ईसाई धर्म कबूल
करता है, तो वह अनुच्छेद 341 के तहत अनुसूचित
जाति को मिलने वाले तमाम सुविधाओं से वंचित
हो जाएगा. और, अगर वही व्यक्ति दोबारा हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म में वापस आ जाता है, तो फिर
से वह पहले के अधिकारों का उपयोग करने के योग्य
हो जाएगा. यह कहना उचित होगा कि पैरा-3 के
प्रावधान गरीब मुस्लिम और
ईसाइयों को धर्मांतरण कर हिंदू, सिख, बौद्ध धर्म
ग्रहण करने के प्रलोभन देने के लिए बनाए गए हैं. वहीं दूसरी ओर यह पैरा हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के
तहत आने वाले अनुसूचित जाति के
लोगों को इस्लाम या ईसाई धर्म कबूल करने के लिए
भी हतोत्साहित करता है. हमारे मुताबिक, यह
प्रावधान गरीब मुसलमानों को इस्लाम छोड़ने
का प्रलोभन देता है. सुप्रीम कोर्ट में पैरा-3 के खिलाफ वर्ष 2004 में एक
रिट याचिका दाखिल की गई. इसमें
कहा गया कि यह पैरा अनुच्छेद, 14, 15, 16 और 25 के
तहत मुस्लिम और ईसाई दलितों को दिए गए
अधिकार का उल्लंघन करता है. इस याचिका के
जवाब में हलफनामा दायर करते हुए केंद्र सरकार ने वर्ष 2005 में रंगनाथ मिश्रा आयोग का गठन
किया. वर्ष 2007 में आयोग ने केंद्र सरकार
को पैरा-3 को समाप्त करने की सलाह दी,
क्योंकि ये पैरा न सिर्फ संविधान के अनुच्छेद 14, 15,
16 और 25 का उल्लंघन करते हैं, बल्कि यह उचित
भी नहीं हैं. हाल में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने अपने
हलफनामा में पैरा-3 को खत्म करने की मांग की.
अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए राष्ट्रीय
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपने हलफनामा में
कहा कि मुसलमान एवं ईसाई
दलितों को भी अनुसूचित जाति का दर्जा देने की मांग की. उनका यह भी कहना था कि इस
प्रावधान से हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से ताल्लुक
रखने वाले अनुसूचित जाति वर्ग पर कोई
नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए. सुप्रीम
कोर्ट द्वारा निर्देश दिए जाने के बावजूद केंद्र
सरकार ने अभी अपना विचार अदालत में नहीं रखा है. यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट इस
मामले में कोई फैसला देने की स्थिति में नहीं है. यह ध्यान देने वाली बात है कि लालू प्रसाद यादव
और मुलायम सिंह यादव ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल
में पैरा-3 को खत्म करने के लिए विधानसभा में
प्रस्ताव पास किया और उसे भारत सरकार
को भेजा. बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय
अध्यक्ष मायावती ने दो सितंबर, 2005 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को तीन पत्र लिखे
और मांग की कि किसी भी धार्मिक अल्पसंख्यक
को धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दी गई है, इसलिए
कॉन्स्टीट्यूशनल (अनुसूचित जाति) ऑर्डर, 1950 के
तहत जोड़ा गया पैराग्राफ सही नहीं है. इससे
सिर्फ हिंदू धर्म के मानने वाले अनुसूचित जाति के लोगों को ही फायदा हो रहा है. पैरा-3 को खत्म
करने की सिफारिश करते हुए उन्होंने
लिखा कि इससे हिंदू धर्म के तहत आने वाले
अनुसूचित जाति के
लोगों को भी अपनी मर्जी का धर्म चुनने
की आजादी होगी. हम इसे असंवैधानिक और भारतीय संविधान में दिए
गए मौलिक अधिकार के खिलाफ अनुचित कानून
मानते हैं. यह भारतीय समजा की धर्मनिरपेक्ष
प्रकृति के खिलाफ है. इसलिए हम भारत सरकार से
इस कानून को तुरंत समाप्त करने की मांग करते हैं. इस
संदर्भ में हम सभी मतदाताओं से अपील करते हैं कि जब कोई उम्मीदवार उनसे वोट मांगने आता है,
तो उन्हें इसी शर्त में उनका समर्थन करना चाहिए
कि उम्मीदवार पैरा-3 के उन्मूलन में गंभीर प्रयास
करेंगे. जो उम्मीदवार इस धार्मिक भेदभाव के
उन्मूलन के पक्ष में नहीं हो, उन्हें यह
कहा जाना चाहिए कि वे उन्हें वोट नहीं देंगे. हम सभी संगठनों से अपील करते हैं कि इस प्रस्ताव
को प्रभावी बनाने के लिए अपने संबंधित क्षेत्र में
मतदाताओं के बीच काम करना चाहिए और उन्हें
जागरूक करना चाहिए. डॉ अनीस अंसारी, आईएएस (सेवानिवृत)

Khan Hamid Raza.

Thursday, 26 December 2013

Mansoor

LOK SABHA 2014 SE QABL HUKUMATI KARWAAI KE LIYE AB 4 MAAH RAH GAYE HAI,N. SACCHAR AUR MISRA REPORTS K ZARIYE MUSALMANO KI BADHALI K MUFASSAL DASTAWEZ KAI BARAS QABL TAIYAR HO CHUKE HAI,N AUR USKE EZAALE KE LIYE ZAROORI EQDAAM KI NISHANDEHI BHI BAHOT PAHLE HO CHUKI HAI. HUKUMAT KE ANDAR AUR BAHAR KHOOB KHOOB TABAADLA E KHAYAL HO CHUKA . U.P.A. KE PAS KOI JAWAAZ NAHI,N BACHTA K AB BHI MUSALMANO SE SIRF WADA HI KARTI RAHE.AKHIRI MOHLAT BHI AB KHATME PAR HAI. MUSALMANO KA HAR EK KAAM KAI BARAS SE MULTAVI HOTA AA RAHA HAI. AAINDA ELECTION ME MUSLIM IN ISSUES KI JANIB U.P.A. KE RAVAIYE KO PESH E NAZAR RAKHTE HUE APNE VOTES KA ISTEMAL KARE,N ,

1: ...... MULK ME 1400 EZAAFI I.P.S. OFFICERS KI KHUSUSI TAQARRURI KE LIYE LIMITED COMPETATIVE EXAM KO KHATM KIYA JAAYE, KYUKI IS TAREEQE SE MUSALMANO KE LIYE RASTA BAND HO JATA HAI (HOME MINISTRY KI ZIMMEDARI)

2: ..... EX PRIME MINISTER INDIRA GANDHI KE ZARIYE CHIEF MINISTERS KO BHEJE GAYE MAKTOOB # 71 - PMO / 76 MARCH 26, 1976 KE MUTABIQ FAURAN KARWAI KI JAAYE

3: ....... SACCHAR COMMITTEE REPORT KE PAGE NUMBER 382 - 401 PAR UN NAAJAYEZ SARKARI QABZO,N KI TAFSEEL MAUJOOD HAI (SACCHAR COMMITTEE AUR JPC WAQF , P.M. OFFICE, MINORITY MINISTRY AUR UPA KE TAHAT TAMAM CHIEF MINISTERS)
4: ....... SKILL DEVELOPMENT KE PROGRAMME AUR DEEGAR EQTESAADI MAWAAQE K LIYE NATIONAL BUDGET ME MUSALMANO K LIYE HISSA MOAIYAN KIYA JAAYE ... DEEGAR MAAHEREEN K ZARIYE TAIYAR KI GAYI REPORT WAADE JO POORE HONA BAQI HAI (PROMISES TO KEEP) (PLANNING COMMISSION FINANCE MINISTRY KI ZIMMEDARI)

5: ...... MUSALMANO KI TARAQQI K NAZARIYE SE BANAYI JAANE WALI INFRASTRUCTURE SCHEMES AUR UNKE NEFAAZ KE LIYE ZILA YA BLOCK KE BAJAAYE DEHI ILAQO,N ME GAO,N KO AUR SHAHRI ILAQO,N ME WARDS KO UNIT BANAYA JAYE ( PLANNING COMMISSION KI ZIMMEDARI )

6: ..... WAQF BILL ME SACCHAR COMMITTEE JPC WAQF KE TAMAM SIFARISHO,N KO SHAMIL KIYA JAYE (WAZARAT E AKLEETI UMOOR KI ZIMMEDARI)

7: ........ SCEDULED CASTE (DARJ FEHRIST ZAAT ) KI TAREEF ME SE ZAAT KI QAID HATAAI JAAYE. PARLIAMENT ME EK SAADA SI QARAARDAAD PAAS KARKE 1950 KE SADAARATI FARMAN K PARA 3 KO HAZAF (DELETE) KIYA JAAYE. (SACCHAR COMMITTEE WA MISRA COMMISSION KI SIFARISH AUR WAZAARAT E QANOON KI ZIMMEDARI )

8: ....... MUSALMANO KE GHALBA WALE UN INTEKHABI HALQO,N (CONSTITUENCIES) KO JINHE SCHEDULED CASTE K LIYE RESERVE KAR DIYA GAYA HAI, UNHE RESERVATION SE AZAD KIYA JAAYE. IN BEQAAYEDGIYO KO DURUST KARNE K LIYE FAURI TAUR SE AGLA HADBANDI (SETTLEMENT) COMMISSION FAURAN TASHKEEL DIYA JAYE , JISE WAZEH HIDAYAT K SATH MOQARRARA MIYAAD ME KAAM MOKAMMAL KARNE KA ZIMMA SAUNPA JAYE. (SACCHAR COMMITTEE KI SIFARISH AUR WAZARAT E QANOON KI ZIMMEDARI )

9: ....... SARKARI AKHTIYAARAAT WALE OHDO PAR MUSALMANO KO NAAMZAD KARNE KE LIYE BAQAAYEDA TAREEQA APNAYA JAYE (SACCHAR WA MISRA COMM. KI SIFARISH AUR CABINET SECRETARY WA WAZARAT E AQALIYAT UMOOR KI ZIMMEDARI )

10: ....... AQALEETO,N K LIYE KIYE JANE WALE RESERVATION BANDOBAST ME MUSALMANO KA 67% HISSA RAKHA JAYE KYUKI MUSALMAN KUL AQALEEYAT KA 73% HAI,N. (MISRA COMM. REPORT , WAZARAT E QANOON , MINISTRY OF PERSONNEL , MINISTRY OF HUMAN RESOURCES AND DEVELOPMENT AUR WAZARAT E PARLIYAMANI UMOOR KI ZIMMEDARI)

11: ....... AQALEETO,N KE LIYE WAZEER E AZAM KA 15 NEKAATI PROGRAMME KA BUDGET BARHAKAR KUL QAUMI BUDGET KA 19% KIYA JAYE KYUKI TAMAM AQALEETE,N MAJMOOI TAUR PAR QAUMI ABADI KA 19% HAI,N (MAAHERIN KI TAJWEEZ AUR WAZARAT E AQALEETI UMOOR, PLANNING COMMISSION AUR WAZARAT E MAALIYAAT KI ZIMMEDARI )

12: ....... MADAARIS KE LIYE BANAAI GAYI SCHEME (SPQEM) KI TASH HEER URDU AUR DEEGAR ZUBANO ME KI JAYE. IS TASH HEER K LIYE HAR SAAL JARI KI JANE WALI 50 LAKH RUPAYE KI GRANT IS KAM KE LIYE ISTEMAL ME NAHI,N LAYI JATI HAI. (MINISTRY OF HUMAN RESOURCES AND DEVELOPMENT KI ZIMMEDARI)

13: ..... MADAARIS KE CERTIFICATES WA DEGREES KA SCHOOLS AUR COLLEGES KE CERTIFICATES WA DEGREES KE SATH TAALMEL BITHAANE KE LIYE MECHANISM QAAYEM KIYA JAYE (SACCHAR REPORT AUR WAZARAT E FAROGH E INSANI WASAAEL , UNIVERSITY GRANT COMMISSION, AUR NATIONAL INSTITUTE OF OPEN SCHOOLING KI ZIMMEDARI )

14 : ...... BANKS ME GAIR SOODI (WITHOUT INTEREST) MAALIYAAT KE MOTABAADIL (ALTERNATIVE) KI IJAZAT DI JAYE. IS SILSILE ME PLANNING COMMISSION KE TAREEQAKAAR ME ISLAAH KI TAJAAWEEZ K LIYE RAGHURAM RAJAN COMMITTEE KI SIFARISHAAT AHAM HAI,N UNHE NAFIZ KIYA JAYE ( PLANNING COMMISSION AUR MINISTRY OF FINANCE KI ZIMMEDARI)

15: ......... DAHSHATGARDI KE ILZAMAT ME MOQAIYAD MUSALMANO K MUQADMO KA TASFIYA KARNE KE LIYE MIYAAD BAND FAST TRACK COURT KI FAURAN TASHKEEL KI JAAYE (WAZARAT E QANOON KI ZIMMEDARI )

16: ........ DAHSHATGARDI KE ILZAMAT SE ADALAT KE ZARIYE BARI KAR DIYE JANE WALE HAR EK SHAKHS KO 50 LAKH RUPAY MOAAWEZA BATAUR HARJANA ADA KIYA JAYE (WAZARAT E DAKHLA KI ZIMMEDARI ) .... AMERICA ME IS DAAWEDARI KI RAQAM
؛ INR ME 1.5CRORE HAI

17: .......... INDIAN WAQF SERVICE QAYEM KI JAYE THEEK USI TARAH JIS TARAH DIFFERENT STATES ME HINDU MANDIRO,N WAGAIRA KE INTEZAM O INSARAM K LIYE RIYASAT K QANOON KI ROO SE SENIOR OHDEDARAN KO HUKUMAT BHARTI KARTI HAI ( SACCHAR COMM REPORT , MINISTRY OF PERSONNEL AUR WAZARAT E AQALEETI OMMOR KI ZIMMEDARI )

18: .......... STATES ME CENTRAL URDU TEACHERS SCHEME KE NEFAAZ KA JAYEZA LIYA JAYE. ZYADATAR SUBO,N ME YE SCHEME NAFIZ NAHI,N HUI HAIWAHA,N USE MARKAZI MONITORING KE ZARIYE NAFIZ KARAYA JAYE ( WAZARAT FAROG E INSANI WASAAEL KI ZIMMEDARI )

19 : ........... EQUAL OPPORTUNITY COMMISSION KI TASHKEEL KI JAYE ISKI TAFSILAAT MAHIREEN KI COMMITTEE 4 SAAL PAHLE HI WAZA,A KAR CHUKI HAI. ( WAZARAT E AQALEETI OMOOR KI ZIMMEDARI )

20 : ........... SCHEMES OF INCENTIVES BASED ON DIVERSITY INDEX NAAFIZ KI JAYE ... 4 saal qabl iski bhi report mahireen ne wazeh kar di hai ( WAZARAT E AQALEETI OMOOR KI ZIMMEDARI )

21 : .......... MUSALMANO KE MAFAAD K LIYE KI JANE WALI MANSOOBABANDI AUR SCHEMES KE NEFAAZ KI NIGRAANI ME MUSLIM TABQA KO SHAMIL KIYA JAYE ( CABINET SECRETARY AUR WAZARAT E AQALEETI OMOOR KI ZIMMEDARI )

22 : ............ MUSALMANO ME SE KUCH AFRAAD KO FAYEDA PAHUCHANE KE BAJAAYE POORE MUSLIM FIRQE KO MAJMOOI TAUR SE MUSTAFEED KARNE PAR TAWAJJAH MARKOOZ KI JAYE.

DR. SYED ZAFAR MAHMOOD SAHEB BAHRAICHI KA MASHKOOR HOO,N P.M.O. DELHI

Khan Hamid Raza

Tuesday, 19 November 2013

भारत में बम विस्फोट कौन करता है ?

भारत में बम विस्फोट कौन करता है ?

1- मालेगाँव का बम विस्फोट-ब्राह्मण जात ''लेफ़्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित'', साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर,
2- अजमेर दरगाह का बम विस्फोट-ब्राह्मण जात स्वामी असीमानंद , इंद्रेश कुमार (आरएसएस के वरिष्ठ नेता), देवेंद्र गुप्ता, साध्वी प्रज्ञा सिंह, सुनील जोशी, संदीप डांगे, रामचंद्र कलसांगरा उर्फ रामजी, शिवम धाक़ड, लोकेश शर्मा, समंदर , योगी आदित्यनाथ.
3- मक्का मस्जिद का बम विस्फोट-स्वामी असीमानंद एन्ड कंपनी
4- समझौता एक्सप्रेस का बम विस्फोट-स्वामी असीमानंद एन्ड कंपनी
5- नांदेड बम विस्फोट-संघ कार्यकर्ता राजकोंडवार तथा नकली दाड़ी और शेरवानी , कुरता , पायजामा भी बरामद
6- गोरखपुर का सिलसिलेवार बम विस्फोट- अज्ञात - आफ़ताब आलम अन्सारी है- गिरफ्तार किया व ब ईज्जत रिहा
7- मुंबई ट्रेन बम विस्फोट - अज्ञात क्योंकि मुस्लिमों को फंसाया नहीं जा सका
7- घाटकोपर में बेस्ट की बस में हुए बम विस्फोट- अज्ञात क्योंकि मुस्लिमों को फंसाया नहीं जा सका .
8- वाराणसी बम विस्फोट-अज्ञात क्योंकि मुस्लिमों को फंसाया नहीं जा सका .
9- कानपुर बम विस्फोट-बजरंग दल कार्यकर्ता भूपेन्द्र सिंह छावड़ा और राजीव मिश्रा
10 पाकिस्तानी कसाब -जिम्मेदार भारत सरकार क्योंकि उसे 15 दिन पहले से जानकारी थी -कमिश्नर मुश्रीफ का बयान

वक़्फ़ जायदाद की दास्तान

MUSALMANO KI APNI KHUD KI WAQF SAMBANDHI SAMPATTI SE HONE WALI AAMDANI KO AGAR KEWAL MUSALMANO PAR HI IM ANDARI SE KHARCH KAR DIYA JAE TO KOI MUSALMAN GHAREEB NAHI RAHEGA AUR USE KISI RESERVATION KI ZARURAT BHI NAHI PADEGI MAGAR AISA NAHI HO RAHA HE, KEWAL CHAND MUSALMAN HI ISKA LUTF UTHA RAHE HEN, KHWAJA GHAREEB NAWAZ KI DAGAH PAR HONE WALI AMAD KA BHI SAHI HISAB-KITAB NAHI HO PATA , YEH EK BAHUT CHHOTI SI MISAL AAPKE SAMNE PESH KI HE, AAP JANTE HEN HINDUSTAN ME KITNI BADI TADAD ME WAQF SAMPATTIYAN HEN JISKI AMDANI KA HISAB SARKAR APNE PAS HI RAKHTI HE, TAJMAHAL ISKI DOOSRI CHHOTI SI MISAL HE, JABKI HINDU DHARM KE LOGON KI DHARMIK SAMPATTIYAN UNKE APNE QABZE AUR NIYANTARAN ME HEN AUR UNSE HONE WALI AMDANI KE WOHI KHUD KAR MUKHTAR HEN. BATAO KOUN AAGE BADEGA WOH YA HUM? PLS GHOUR KAREN AUR MUSLMANO SE NAFRAT KARNA BAND KAREN, HUM AAPKE WOH BHAI HEN JO APNA TAN KAT KAR IS DESH KE KHAZANE ME WAQF INCOME SABHI KE KALYAN KE LIYEN IS DESH KE KALYAN KE LIYEN SADIYON SE DETE AA RAHE HEN.-----BY AZEEM IQBAL KHAN ADVOCATE, PRESIDENT- ALL INDIA MUSLIM FEDERATION RAMPUR, MOBILE NO- 9027920133

हिंदुस्तान की सबसे अमीर कौम जिसकी खुद की 1.5 लाख करोड़ से अधिक की जायदाद लेकिन जी रही तंग हाल....

वक़्फ़ जायदाद की दास्तान
हालात सुधार नहीं पा रहीं 22 हज़ार जायदादें
दो हज़ार विभिन्न अदालतों में उलझीं
क़ाबिज़ों से ख़ाली कराने में असक्षम वक़्फ़ बोर्ड

जयपुर। क्या उस क़ौम की आर्थिक, शैक्षिक, सामाजिक स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है, जिसके पास 22 हज़ार संपत्तियां ऐसी हों, जिनकी आमदनी इस क़ौम के विकास पर ख़र्च करने का शरीयत का प्रावधान हो? ये संपत्तियां पूरे राजस्थान में वक़्फ़ जायदादें हैं। इन्हें ना बेचा जा सकता, ना ख़रीदा जा सकता, केवल विकास किया जा सकता है और इसकी आय से क़ौम में शैक्षिक तरक़्क़ी की जा सकती है। जबकि सच्चाई इन प्रावधानों से बिल्कुल परे है। इस 22 हज़ार के आंकड़े से वक़्फ़ बोर्ड को मुश्किल से एक करोड़ रुपए सालाना मिलते हैं, जो कि कर्मचारियों की तन्ख्वाह, मेंटीनेंस के लिए नाकाफी है। वजह साफ है, यह आंकड़ा केवल कागज़ों में ही है, सच्चाई यह है कि क़रीब दो हज़ार वक़्फ़ जायदादें कई अदालतों में उलझी हैं, जिस के लिए वक़्फ़ बोर्ड पैसा व समय खर्च कर रहा है। आम लोगों का तो इन पर क़ब्ज़ा है ही, ख़ुद सरकार के कई दफ्तर इन जायदादों पर उन किरायेदारों की तरह क़ब्जेदार बने हुए हैं, जो ना किराया चुकाते, न ख़ाली करते। फिर सरकार हिसाब करती है, तो ऐसे कि साढ़े तीन प्रतिशत में चुकता कर देती है। क़ब्ज़े से ख़ाली कराने की नीयत तो है, लेकिन इस जंजाल में इसलिए ख़ुद वक़्फ़ बोर्ड हाथ नहीं डालना चाहता कि ना पुलिस मदद करती और ना ही प्रशासन साथ देता।

क्या है वक़्फ़ जायदाद?
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वक़्फ़ जायदाद वे संपत्तियां हैं, जिनके कोई मालिक नहीं या जिन्हें उसके मालिक ने उसे अल्लाह की राह में क़ुर्बान कर दिया। बुख़ारी शरीफ के अनुसार जायदाद को इस तरह ख़ैरात (दान) कर दो कि वह ना बेची, ना ख़रीदी जा सके और ना उसका कोई वारिस हो, बल्कि इसका फ़ायदा लोगों को मिले।
हिन्दुस्तान में दो तरह की वक़्फ़ जायदादें पाई जाती हैं। पहली वे जायदादें हैं, जिनके मुसलमान मालिक बंटवारे के समय, उन संपत्तियों को ख़ाली छोड़कर चले गए थे, बाद में उनके कोई मालिक नहीं रहे। दूसरी वे जायदादें, जो किसी व्यक्ति ने इसलिए वक़्फ़ कर दी (छोड़ दी) कि उससे शरीअत से जुड़े काम हों, लोगों की मदद हो, मुसलमानों की शिक्षा व सामाजिक तरक़्क़ी के काम ली जा सके।

अदालतों में फंसी संपत्तियां
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सुप्रीम कोर्ट- 4
हाईकोर्ट- 240
वक़्फ़ ट्रिब्यूनल- 661
सिविल कोर्ट- 57
एस्टेट ऑफिसर ऑफ वक़्फ़- 1000
कुल---------1962

63 पर सरकारी दफ्तर ही काबिज... पूरे राज्य में 63 वक़्फ़ जायदादें ऐसी हैं, जिन पर कोई व्यक्ति, संस्था, ट्रस्ट काबिज नहीं, बल्कि ख़ुद सरकार के दफ्तर क़ाबिज़ हैं। इसे ख़ुद वक़्फ़ बोर्ड की कमी कहें या कुछ और कि इनमें केवल 34 जायदादें ऐसी हैं, जिनके किराये का आकलन किया गया है। बाकी 29 जायदादों की ना तो वक़्फ़ बोर्ड की ओर से सुध ली जाती, ना पता लगाया जा रहा, ना ही उनकी मिल्कियत का अंदाज़ा बोर्ड को है और ना ही यह जानने की कोशिश की जा रही कि इन संपत्तियों पर कब से कौन सा सरकारी दफ्तर क़ाबिज़ है और उस पर अब तक कितना किराया बकाया है?

सरकार ने ही दिया लॉलीपॉप
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सरकारी दफ्तर इन 63 वक़्फ़ जायदादों पर उन किरायेदारों की तरह क़ाबिज़ हैं, जो ना किराया देते, ना ख़ाली करते। पिछले कुछ सालों में मुस्लिम समाज के काफी दबाव के बाद सरकार ने इस मामले की सुध तो ली और अमली जामा पहनाया, लेकिन बच्चों को लॉलीपॉप देकर खुश करने जैसी क्रिया कर, सरकार खुद को गंगा नहाया समझ बैठी। दरअसल बोर्ड ने 34 ऐसी वक़्फ़ जायदादों की मिल्कियत और उन पर क़ाबिज़ सरकारी दफ्तरों के किराए का आकलन किया, तो सरकार पर चौंकाने वाली क़र्ज़दारी खुली। बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार यह क़र्ज़दारी क़रीब 100 करोड़ थी, जो वक़्फ़ बोर्ड के गठन से पहले से अब तक तय की गई। सरकार ने इतनी बड़ी रक़म देने के बजाय बोर्ड को वित्तीय वर्ष 2012-13 में मात्र 3.50 करोड़ रुपए देकर पूरी क़र्ज़दारी चुकाने का दावा कर दिया। ख़ास बात यह रही कि वक़्फ़ बोर्ड ने राज़ी ख़ुशी सरकार की इस नीयत को बाइज़्ज़त क़ुबूल भी कर लिया। यह बात क़रीब डेढ़ दो साल पुरानी है, उसके बाद अब तक एक भी वक़्फ़ जायदादों का किराया बोर्ड के खाते में नहीं आया।

ना पुलिस का साथ, ना प्रशासन की मदद
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क़रीब एक हज़ार वक़्फ़ जायदादें ऐसी हैं, जिन पर नाजायज़ तरीक़े से लोगों ने अतिक्रमण कर रखे हैं। वक़्फ़ बोर्ड के प्रावधानों के अनुसार अतिक्रमण साबित होने पर पुलिस व स्थानीय प्रशासन की मदद से जायदादों को ख़ाली कराया जा सकता है, लेकिन ना पुलिस मदद करती है और ना ही प्रशासन का साथ मिलता है। कभी कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति बताकर, तो कभी एक ही संप्रदाय का निजी मामला समझकर, कोई दख़ल नहीं दिया जाता। ऐसे में अतिक्रमियों के हौसले बुलंद हैं।

Sunday, 6 October 2013

Government schools

Government schools ko private school ke level me kar diya jaye aane wali pidhi se reservation naam ki nautanki khatm ho jayegi aur GENERAL,OBC,SC/ST is base pe koi neta vote ki nautanki nai kar payega...
Equality jab aa jayega fir humara desh aage badhta jayega..

Jinke pas paisa h unke bache to private school,kota,Delhi me pdhai karke life me aage badh jate h..
Jin maa-baap ke pas paise nai h unke bache goverment school me padhte h aur pichhe rah jate h...

Goverment schools me education nai diya jata sakshar bnaya jata h...
1000 student pe 8-10 teacher,no computer eduction ,no library ye sab to chhoro pine ka saaf pani tak nai aur mid day mil ka case sabko pta h..
Agar Desh ko badalna h to GOVERMENT SCHOOLS KO PRIVATE SCHOOLS KE LEVEL ME LANA JARURI H..
Jab sab well-educated honge to cast&religion base pe fight kam ho jayegi..
Jai hind!

Ravi Kumar

Mai is DUNIYA(for ex:-India) me aa gya hu..

Ek CHILD (boy/girl).....

Mai is DUNIYA(for ex:-India) me aa gya hu...
Mujhe btao mai kaun hu (family& society se duniya ke bare me pta chalta h).....
Mai HINDU,MUSLIM,SIKH,ISAI (christian) kis religion ka hu....
Mai General/OBC/SC/ST isme kis category me aata hu..
Maine Amir (rich) family me janm liya h ya garib(poor) family me..
Mujhe private school me padhne ko mauka milega ya government school me padhna padega..
Kya mujhe v Reservation ki jarurat padegi...
Mai ladka hu ya mai ladki hu..
Agar mai ladka hu fir to problems kam face karna padega agar mai ladki hu to fir family ka bojh (dahej,education,safety problem)....
Mai kaunsi political party ko support karunga aisi koi party h..jo insaniyat ki baat karti h...
Jo mujhe family ,society ,Desh se milega waisa hi mai ban jaunga...
Jai hind!


Ravi Kumar