Thursday, 20 December 2012

ek badi charcha,vakil aap,judge desh ki janta

ek badi charcha

doston vakil aap honge aur judge desh ki janta hogi.

(1) Kuchh log kahte hain ke bharat me Ram raaj ana chaye.
(2) Kuchh log kahte hain ke bharat me allah ki hukumat aani chaye.
(3) Kuchh log kahte hain ke bharat me bahujan raaj ana chaye.

(a) Ram raaj lane wale batayen ke agar raam raj aya to Darzano dharm aur hazaron jaati wale
bharat desh ko kais chalao ge ?
(b) Allah ki hukumat lane wale batayen ke agar allah ki hukumat aayee to Darzano dharm aur hazaron jaati wale bharat desh ko kais chalao ge ?
(c) bahujan raaj lane wal batayen ke agar bahujan raaj raj aya to Darzano dharm aur hazaron jaati wale bharat desh ko kais chalao ge ?

teeno group se guzarish hai ke aap sirf apna pakchh rakhe ge,kisi ki baat ko nahi kato ge aur na kisi se uljho ge,is baat ka unlanghan hota hai to aap ka comment delete kar diya jaye ga.

Wednesday, 19 December 2012

Balaatkaari ke liye saja to hona chahiye aur samaaj ko maryaadit aur sanskaari bhi hona padega



Globalization aur samaaj ke badaltey parivesh mey balatkaar aur yaun-shoshan jaisi ghatnaaye badhti hi jaa rahi hai.

Dono hi ghatnaao ko alag thalag kar key nahi dekha jaa sakta hai .Ye ek sikkey ke do pehlu hai. Jaha blaatkaar balpoorvak stri-apmaan ki parakaastha hai tp wahi youn-shoshan stri ki aarthik aur bhaavnaatmak roop se majboor karkey apmaan ki parakaastha.

Satya to yahi hai ki stri ek dhan ke samaan hi hai. jiski suraksha ati aavashyak hai. Stri ki laalsa se rishi muni aur saadhu sanyaasi bhi achootey nahi rahey hai. Aur ye sirf avsar praapti pe nirbhar karta hai.

Bharteeya sanakriti , paaschatya sabhyata ke andhadhund anusaran ke liye bilkul bhi upyukt nahi hai. Paashchatya samaaj mey unnmukt yaun sambandho ke chaltey balatkaar jaisi ghatnaaye kam hoti hai kyoki tab uski aavshaykta hi samaapt ho jaati hai .

Aaj naari ki sammaj mey badhti bhaagidaari aur uska aakarshak uttejak pehnaava, swachanda aachran ,boyfriend ki laalsaa aur live in relationship Jaisey ghatiya jeevan shaili kaafi had tak jimmedaar hai. Paridaamswaroop samaaj mey kuntha badhi hai par bhugatna aurat ko hi padta hai.

Cinema aur media ney bhi samaaj ki aisi taisi kar rakhi hai. Sunny Leon jaiso ko media uchaal uchaal kar dikhata hai aur aajtak news to porn ka adda ban chuki hai. Antarang sambandho aur nagn tasveerey dikha kar ye samaaj se kya ummed rakhtey hai?

Aur ant mey police aur prashashan ki susti aur nyaay ki durbalta naari apmaan ki sharankhala mey aakhiri keel thok deti hai.....

Balaatkaari ke liye kadi saja ka pravdhan to hona hi chahiye parantu samaaj ko maryaadit aur sanskaari bhi hona padega anytha kuch nahi honey waala....

Tuesday, 18 December 2012

कुर्बानी कुर्बानी कुर्बानी अल्लाह को प्यारी ...है कुर्बानी।

अशफाक बिस्मिल शहीद दिवस की संसार वासियों को मुबारकबाद, मेरे हिसाब से शहीद दिवस तो हर रोज, हर पल पल मनाना चाहिए क्योकि हम भारत वासी शहीदों का ऋण कभी उतार नहीं पाएंगे।
और याद रखो संसार वासियों ... कुर्बानी कुर्बानी कुर्बानी अल्लाह को प्यारी ...है कुर्बानी।

पंडित रामप्रसाद ' बिस्मिल ' और अशफाकउल्ला खां घनिष्ट मित्र थे । ' बिस्मिल ' पक्के आर्य समाजी थे और अशफाकउल्ला खां पक्के मुसलमान । अशफाकउल्ला खां का कहना था की ' देश सेवा या मित्रता के मामले में मज़हब बीच में कहा आता है ? ' ईशवर उपासना के सिवाय अन्य किसी भी मामले में मज़हब को बीच में क्यों आना चाहिए ?
यह दोनों शाहजहां पुर के निवासी थे । काकोरी काण्ड में अन्य लोगो के साथ साथ ये दोनों भी सम्मिलित थे । दोनों को फांसी की सजा हुई थी । जब काकोरी में रेलगाड़ी लुटने की योजना पर क्रान्तिकारी दल में विचार चल रहा था, तब अशफाकउल्ला ने रेलगाड़ी में से सरकारी खजाना लुटने का यह कह कर विरोध किया था की इस से सरकार हाथ धो कर क्रांतिकारियों के पीछे पड़ जाएगी और हम आगे अपनी गतिविधिया जारी नहीं रख सकेंगे । बात सही थी, परन्तु जब पार्टी के अधिक लोगो ने बहुमत से योजना को स्वीकार कर लिया, तब अशफाकउल्ला उनके साथ हो गए । सभा में खुल कर अपनी बात कहो, परन्तु बहुमत से जो निशचय हो जाये, उसका ईमानदारी से भरसक पालन करो । यही संगठन की नीति है ।

उनके निकट मंदिर और मसजिद एक समान थे एक बार जब शाहजहांपुर में हिन्दू और मुसलमानों में झगड़ा हुआ और शहर में मारपीट शुरु हो गई उस समय आप बिस्मिल जी के साथ आर्य समाज मन्दिर में बैठे हुए थे । कुछ मुसलमान मन्दिर के पास आ गए और आक्रमण करने के वास्ते तैयार हो गएं । आपने अपना पिस्तौल फौरन निकाल लिया । और आर्य समाज मन्दिर से बाहर आकर मुसलमानों से कहने लगे कि मैं कटटर मुसलमान हूं परन्तु इस मन्दिर की एक-एक ईंट मुझे प्राणों से प्यारी है । मेरे नजदीक मन्दिर और मसजिद प्रतिष्ठा बराबर है । अगर किसी ने इस मन्दिर की ओर निगाह उठाई तो गोली का निशाना बनेगा । अगर तुमको लड़ना है तो बाहर सड़क पर चले जाओ और खूब दिल खोल कर लड़ लो । उनकी इस सिंह गर्जना को सुन कर सब के होश हवास गुम हो गए । और किसी का साहस न हुआ जो आर्य समाज मन्दिर पर आक्रमण करे सारे के सारे इधर उधर खिसक गए । यह तो उनका सार्वजनिक प्रेम था । इस से भी अधिक आपको बिस्मिल जी से प्रेम था

देश में हिन्दू मुस्लिम दंगे --

एक बार शाहज़हा पुर में हिन्दू- मुस्लिम दंगा हो गया, जैसे की उन दिनों सरकारी लोगो के भड़काने पर अनेक शहरो पर होता रहता था और आज भी ऐसे ही बुरे लोगो की वज़ह से होता है । तब अशफाकउल्ला ने ठेठ मुसलमानी वेश धारण किया - शेरवानी और पायजामा ; सिर पर तुर्की टोपी लगाई, जो दूर से ही दीखे । पंडित रामप्रसाद बिस्मिल ने धोती, कुर्ता पहना । माथे पर चन्दन का टिका भी लगाया । दोनों बाज़ार में जा कर खड़े हो गए और लोगो को समझाने लगे की ' सरकार हिन्दुओ और मुसलमानों को आपस में लडाना चाहती है, जिससे अंग्रेज हिंदुस्तान पर राज करते रह सके । हिन्दुओ और मुसलमानों, दोनों को इस बात को समझना चाहिए और एक दुसरे पर छुरा नहीं चलाना चाहिए । दोनों ही भारत माँ की संतान है । दोनों को यहाँ रहना है । तो अच्छा है मिल कर प्रेम से रहे ।
इस अपील का तुरंत और अच्छा प्रभाव पड़ा । दंगा समाप्त हो गया ।

दोनों मित्र कवि
अश्फाक उल्ला खां भावुक और कवि थे । वह ' हसरत ' उपनाम से कविता लिखते थे । राम प्रसाद भी उच्च कोटि के कवि थे । दोनों का डीलडोल बड़ा और सुन्दर था । दोनों कुशल निशानेबाज़ थे । अश्फाक को शिकार का भी शौक था । ' बिस्मिल ' पशु - पक्षियों पर गोली नहीं चलाते थे ।

राम राम !
एक समय की बात है आपकी बीमारी के कारण दौरा आ गया । उस समय आप राम-राम कह के पुकारने लगे । माता-पिता ने बहुतेरा कहा कि तुम मुसलमान हो खुदा-खुदा कहो, परन्तु उस प्रेम के सच्चे पुजारी के कान में यह आवाज ही नहीं पहुंची और वह बराबर राम-राम कहता रहा । माता-पिता तथा अन्य सम्बन्धियों की समझ में यह बात न आई । उसी समय एक अन्य व्यक्ति ने आकर उन के सम्बन्धियों से हा कि यह राम प्रसाद बिस्मिल को याद कर रहे है । यह एक दूसरे को राम और कृष्ण कहते है । अतः एक आदमी जाकर रामप्रसाद जी को बुला लाया उन को देख कर आपने कहा राम तुम आ गए । थोड़ी देर में दौरा समाप्त हो गया । उस समय उन के घर वालों को राम का पता चला । उनके इन आचरणों से उनके सम्बन्धी कहते थे कि वे काफिर हो गये हैं । किन्तु वे इन बातों की कभी परवाह न करते और सदैव एकाग्र चित्त से अपने व्रत पर अटल रहते ।

जब अशफाक ने अमृतसर के जलियावाला बाग में निहत्ते, निरीह और निरपराधी भारतीय जनता पर जरनल डायर द्वारा गोलिया बरसाने की बात सुनी तो अत्याचारी अंग्रेजो का लहू बहा देने के कारन उनकी भुजाय फड़कने लगी । उनका चेहरा इस प्रकार तमतमा उठा जैसे जिस्म का ख़ून खोलने लगा हो । अशफाक ने किसी तरह स्वय को संयत किया और रामप्रसाद बिस्मिल के साथ भावी योजनाओ पर मंत्रणा करने का निश्चय किया ।
रामप्रसाद बिस्मिल उस समय संगठन के काम से शाहजहांपुर से बहार गए हुए थे । जब वे शाहजहांपुर लौटे तो अशफाक से मिले ।
"राम!" अशफाक व्यग्रता से बोले --- "यूँ इस प्रकार कब तक चलेगा ?"
अशफाक रामप्रसाद बिस्मिल को 'राम' कहकर ही संबोधित किया करते थे, जबकि अशफाक को क्रान्तिकारी 'कुवर' कहकर बुलाया करते थे ।
रामप्रसाद बिस्मिल अशफाक का मंतव्य न समझ सके । एकाएक इस प्रकार कही गई अशफाक की बात का वे कोई अर्थ न समझ सके । अत : असमंजस के भाव से बोले --- "क्या कहना चाहते हो कुंवर ! मैं तुम्हारी बात का कोई अर्थ नहीं समझ सका ।"
"
"ये अत्याचारी अंग्रेज कब तक हमारे मुल्क के बाशिंदों को कीट - पतंगों की तरह गोलियों से भूनते रहेंगे... कब तक इन जालिमो का कहर हमारे देशवासियों पर टूटता रहेगा ... कब तक ये सितमगर हमें कीड़े - मकोडो की तरह अपने पांवो तले कुचलते रहेंगे ... कब तक राम ... आखिर कब तक ... ?" कहते - कहते अशफाक भावुक हो उठे । उनकी आंखे छलछलाने लगी ।
रामप्रसाद बिस्मिल को अशफाक की आँखों में अपने देश और देशवासियों के लिए प्यार का गहरा सागर ठाठे मारता महसूस हुआ । ऐसा लगता था मनो यह सागर किनारे तोड़कर दुनिया - जहान को अपनी गर्दिश में बहा ले जाने के लिए मचल उठा हो ।
रामप्रसाद ने भाव - विहवल होते हुए अशफाक के कंधे पर कोमलता से हाथ रखा और प्यार से समझाते हुए बोले --- "कुंवर ! अगर तुम्हारे जैसे शेरदिल जंवा यूँ इस तरह भावनाओ में बह जायंगे तो मझदार में डूबती मुल्क की इस नेया को कोंन संभालेगा ? कोंन इसका खेवणहार बनेगा ?"
बिस्मिल की इस भावुक नसीहत पर अशफाक खुद को संभाल न सके । उनकी आँखों के उमड़ता - घुमड़ता सागर किनारे तोड़ बेठा और आंसुओ का सेलाब बहने लगा । बिस्मिल ने प्रेम से अशफाक को अपने ह्रदय से लग लिया । प्रिय मित्र की सांत्वना पाकर अशफाक रामप्रसाद बिस्मिल के कंधे से लगकर सिसकिया भर - भरकर रो पड़े । अशफाक की भावुकता पर रामप्रसाद की आंखे भी छलक उठी । दोनों मित्र एक - दुसरे की पीठ थपथपा रहे थे... एक दुसरे को सांत्वना दे रहे थे, किन्तु एक दुसरे को चुप कराते कराते खुद ही बिलख - बिलखकर रो रहे थे ।

अपने देश और देशवासियों के लिए इन देशभक्तों के ह्रदयो में कितना प्रेम था ! क्या इनके उस असीम प्रेम का कोई अनुमान लगा सकता है ? नहीं ... कदापि नहीं !
"राम ! मेने राम !!" अशफाक रामप्रसाद के कंधे पर सिर रखे हुए ही सुबकते हुए बोले --- "क्या इन जालिमो के जुल्मो - सितम को मिटाने और मुल्क के बाशिंदों की जानबख्सी का कोई हल नहीं है ?"
"कुंवर ! इस जहां में ऐसी कोंन - सी मुसीबत है, जिसका खुदा के नैक बन्दों के पास कोई हाल न हो ।"
"तो फिर जल्दी से मुझे वो हल बताओ राम !"
"वो हल है क़ुरबानी !"
"क़ुरबानी ?"
"हा, क़ुरबानी ... बलिदान !" रामप्रसाद शून्य में टकटकी लगाकर कहेने लगे --- "इस जहां की छोटी - से - छोटी और बड़ी - से - बड़ी हर मुसीबत का हल क़ुरबानी में छुपा है और ... और क़ुरबानी तो अल्लाह को भी सबसे प्यारी है ।"
"हा राम ! तुम बिलकुल ठीक कह रहे हो ।" अशफाक गंभीरता से बोले ---- "अब्बा हुजुर का भी यही कहना है की क़ुरबानी अल्लाह तआला के नजदीक सबसे अहमतरीन अरकार है मगर मुझे यह तो बताओ की मैं अपनी क़ुरबानी किस तरह दूँ ... किस तरह खुद को अपने मुल्क पर कुरबान करू ?"
"सिर्फ तुम्हारी क़ुरबानी से काम नहीं चलेगा कुंवर !" रामप्रसाद तमतमाते स्वर में बोले --- "तुम्हे, मुझे और ... हमारे जैसे और भी अनेक मात्रभूमि के लालो को इसकी बलिवेदी पर अपना बलिदान देना पड़ेगा, तभी आततायियो की बेडियो में जकड़ी गुलाम भारतमाता आज़ादी की साँस ले सकेगी ।"
"राम ! मैं हर क़ुरबानी ... हर बलिदान देने के लिएय प्रस्तुत हूँ ।"
"ठीक है कुंवर ! वह वक्त अभी भी, कभी भी, बहुत जल्द आ सकता है । तुम्हे, मुझे और हमारे जैसे योद्धाओ को उसकी हरदम - हर पल प्रतीक्षा में तत्पर रहना चाहिए ।"
"राम ! में तो हरदम - हर पल तेयार ही बेठा हूँ । मेरा रब ... मेरी क़ुरबानी कबुल तो करे ।"

बिस्मिल हिन्दू हैं कहते हैं, फिर आऊँगा-फिर आऊँगा;
ले नया जन्म ऐ भारत माँ! तुझको आजाद कराऊँगा।।
जी करता है मैं भी कह दूँ, पर मजहब से बँध जाता हूँ;
मैं मुसलमान हूँ पुनर्जन्म की बात नहीं कह पाता हूँ।
हाँ, खुदा अगर मिल गया कहीं, अपनी झोली फैला दूँगा;
औ'जन्नत के बदले उससे, यक नया जन्म ही माँगूँगा।। ----"अमर शहीद अशफाक उल्ला खाँ"

5 log convenor honge unke liye 8 sujhao



Jo 5 log convenor  honge unke liye 8 sujhao
(1)    sabhi  convenor  me team work  ki  aadat  hona  chahye.
(2)    sabhi  convenor   apas  me  ham  khayal  aur ham mijaj hona  chahye.
(3)    sabhi  convenor   ek dusre se paidal  30 minute ki doori par rahte hon.
(4)    sabhi  convenor  ko  disha  aur  maqshad  samajhna  chahye.
(5)    sabhi  convenor  me  khidmat-e-khalq ka zazba  hona  chahye.
(6)    sabhi  convenor  samay  ka  paband  hona  chahye.
(7)    sabhi  convenor  sangathan  ki  har  harkat  par  nazar  rakhni  chahye.
sabhi  convenor  ke  saamne hisab-kitab  khula  rahna  chahye.

Hindu leadership se siyasi aur samajik samjhota hona chahye.


Hindu  leadership se  siyasi  aur  samajik samjhota  hona  chahye.

•       (1)Kabhi bangla deshi ke naam par.
•       (2)Kabhi Pakistani ke naam par
•       (3)Kabhi Kashmir ke naam par.
•       (4)Kabhi atankwad ke naam par.
•       (5)Kabi Danga fasad ke naam par.
•       (6)Kabhi Bomb blast ke naam par.
•       (7)Kabhi alag alag tanzeemon ke naam par.
•       (8)Kabhi andolan ke naam par.
•       (9)Kabi Muslim Bachchon ko beja  griftar karke .
•       (10)aur kayee trike se musalmano ko darane,dabane aur uttejit karne ka kaam  ho raha hai.
in maslon ko hal karne ke liye musalman  kisi  party  ka  part  na  bane  balke Desh ki sabhi muslim  party,sabhi muslim tanjime  maslak  se  upar  uthkar  ek mahaj bana kar hindu leadership ke saath samjhota karna is waqt ki ahem zarurat hai.
Kyun  ke  Jiske  saat matbhed  hote  hain  unhi  ke  saath  hi  samjhota  kiya  jata  hai

Desh aur qaum ke liye kisi ko talwar ya banduk uthane ki zarurat nahi hai


Desh aur qaum ko behtar banane ke liye kisi ko talwar ya banduk uthane ki zarurat nahi hai,agar ajamik logon se nipatne ki naubat aati hai to desh ka kanun aur desh ka hathyar uske liye kafi hai.

kuchh asaan sujhao hain jo aaj se AIMM ke banner tale kosiss suru karte hain to is kosiss ka natiza  turant nazar aane lagega.

(1)    Kuchh  logon  ko  zameen par paidal  chalna hoga,
(2)    Kuchh  logon  ko  dhoop,thandi,barish ki takleef  jhelni hogi,
(3)    Kuchh  logon  ko  safar  bhi  karna  hoga,
(4)    Kuchh  logon  ko  logo se mulakat  ka waqt  bhi  nikalna  hoga,
(5)    Kuchh  logon  ko  bhook  piyass bhi  jhelni  hogi,
(6)    Kuchh  logon  ko  kuchh maal bhi  kharch  hoga,
(7)    Kuchh  logon  ko  hafte  me  ek din dena  hoga,
(8)    Kuchh  logon  ko  poora  waqt  dena  hoga,

(a)    mard ho  ya aurat Sabhi  log  apna ekhlaq,apna  kirdar sambhale,
(b)   mard ho  ya aurat Sabhi  log  apnana  veohar  sawnare,
(c)    mard ho  ya aurat Sabhi  log  ko  apne  kaam  me imandar  hon,
(d)   mard ho  ya aurat Sabhi  log  ko  sangatha  ki  kamyabi  ke  liye  dua  kare,
(e)   mard ho  ya aurat Sabhi  log  ko is kaam ke liye kam se kam ek mahine me  10 rupya de,
(f)     mard ho  ya aurat Sabhi  log  ko  kam se kam  ek  saal  me  ek  din ka  waqt  de,
(g)    mard ho  ya aurat Sabhi  log   kam se kam  ek  doosre  ka  hausla  badhayen,