Wednesday, 30 January 2013

सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्तां हमारा !

सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्तां हमारा !
हम बुलबुले हैं इसकी, यह गुलिस्ताँ हमारा !

ग़ुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में !
समझों वहीँ हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा !!

पर्वत वोह सबसे ऊंचा, हमसाया आसमां का !
वो संतरी हमारा, वोह पासबाँ हमारा !!

गोदी में खेलती हैं, जिसकी हज़ारों नदियाँ !
गुलशन है जिनके दम से रश्क-ए-जनां हमारा !!

ए आब-ए-रूद-ए-गंगा, वोह दिन है याद तुझको !
उतरा तेरे किनारे, जब कारवां हमारा !!

मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना !
हिन्दी हैं हम वतन हैं, हिन्दोस्तां हमारा !!

यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रोमां, सब मिट गए जहाँ से !
बाक़ी मगर है अब तक नाम-ओ-निशां हमारा !!

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी !
सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-ज़मां हमारा !!

"इकबाल" कोई महरम अपना नहीं जहाँ में !
मालूम क्या किसी को, दर्द-ए-निहां हमारा !!

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