‘जय हिंद’ का नारा सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के
कप्तान "आबिद हसन" ने 1942 में दिया था, जो आज तक भारतीयों के लिए एक
मंत्र के समान है। यह नारा नेताजी को फौज में सर्वअभिनंदन भी था।
इस देश के लिए मुसलमानों ने अपना जो योगदान दिया है, उसे क
िसी भी हालत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कितने ही शहीद ऐसे हैं, जिन्होंने देश के लिए अपनी जान तक कुर्बान कर दी, लेकिन उन्हें कोई याद तक नहीं करता। हैरत की बात यह है कि सरकार भी उनका नाम नहीं लेती। इस हालात के लिए मुस्लिम संगठन भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। वे भी अपनी कौम और वतन के शहीदों को याद नहीं करते।
इस देश के लिए मुसलमानों ने अपना जो योगदान दिया है, उसे क
िसी भी हालत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कितने ही शहीद ऐसे हैं, जिन्होंने देश के लिए अपनी जान तक कुर्बान कर दी, लेकिन उन्हें कोई याद तक नहीं करता। हैरत की बात यह है कि सरकार भी उनका नाम नहीं लेती। इस हालात के लिए मुस्लिम संगठन भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। वे भी अपनी कौम और वतन के शहीदों को याद नहीं करते।
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