Friday, 14 December 2012

दुनिया में सुधार के पश्चात उपद्रव न फैलाओ

दुनिया में सुधार के पश्चात उपद्रव न फैलाओ

ऐ र्इमानवालो! किसी (विशेष) जाति की शत्रुता तुम्हारे लिए इस बात का कारण न बन जाए कि तुम न्याय न कर सको। (तुम न्याय किया करो) वह संयम से अधिक निकट हैं और र्इश्वर से डरो। निस्संदेह, र्इश्वर को तुम्हार
े सभी कार्यो की पूरी सूचना है।(कुरआन, 5:8)

पैग़म्बर मुहम्मद (S.A.W) ने हमें नफ़रत के बजाय प्रेम और प्रतिशोध के बजाय माफ़ी का तरीक़ा सिखाया है। हम ख़ुद भी इसी

तरीक़े पर चलें और दूसरों को भी यही तरीक़ा सिखाएं तो क्या हमारा कोई दुश्मन बाक़ी बचेगा ?

अब दुनिया में वह बेहतरीन गिरोह तुम हो जिसे इन्सानों की हिदायत और सुधार के लिए मैदान में लाया गया है। तुम नेकी का हुक्म देते हो, बदी से रोकते हो और अल्लाह पर ईमान रखते हो। (Book)आले इमरान 3: 110

निन्दनीय तो वे हैं, जो दूसरे पर जुल्म करते हैं और धरती में नाहक उपद्रव मचाते हैं। ऐसे ही लोगो के लिए दु:खदायिनी यातना हैं।(कुरआन, 42:42)
(5) र्इश्वर से डरो और निरर्थक बकवास से बचो और बात ठीक कहो।
(कुरआन, 33:70)

अत्याचारियों के पास यदि दुनिया-भर की वस्तुएं हो और उन वस्तुओं के साथ उतनी और भी हो तो वे लोग प्रलय के दिन कड़ी यातना से छूट जाने के लिए उन्हे देने लगें, फिर भी र्इश्वर की ओर से उनको ऐसी घटना का सामना करना पड़ेगा जिनकी उन्होने कल्पना भी न की थी। (कुरआन, 29:47)

दुनिया में सुधार के पश्चात उपद्रव न फैलाओ,और तुम र्इश्वर की उपासना उससे डरते हुए और उम्मीद रखते हुए किया करो। निस्संदेह, र्इश्वर की कृपा सुकर्म करनेवालों के निकट है। (कुरआन, 7:56)

हकीकत यह है कि अल्लाह किसी कौम के हाल नहीं बदलता जब तक वह खुद अपने आपको नहीं बदल देती। रअद- 13: 11

मेने वही बाते कही है जो इस्लाम कहता है आप मे से कुछ लोगो को बुरा लग सकता है लेकिन सच तो यही है की.................सुधार करने की जरूरत है

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