गोपीचंद नारंग को पाकिस्तान का सम्मान
भारत में रहने वाले उर्दू के मशहूर लेखक गोपीचंद नारंग को पाकिस्तान के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान सितारा-ए-इम्तियाज़ से सम्मानित किया गया है.
इस बार पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सआदत हसन मं
भारत में रहने वाले उर्दू के मशहूर लेखक गोपीचंद नारंग को पाकिस्तान के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान सितारा-ए-इम्तियाज़ से सम्मानित किया गया है.
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टो और जोश मलिहाबादी को भी निशान-ए-इम्तियाज़ और हिलाल-ए-इम्तियाज़ से सम्मानित किया गया है.
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कराची साहित्य समारोह: तस्वीरें
भारतीय साहित्यकार को पाकिस्तान का सम्मान
सारे जहां में धूम उर्दू ज़बाँ की है..!
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भारत
इससे पहले भारत से पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई और नामी अभिनेता दिलीप कुमार को भी पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार निशान-ए-इम्तियाज़ दिया जा चुका है.
81 वर्षीय नारंग को भारत सरकार ने भी 2004 में पद्म भूषण से सम्मानित किया था. गोपीचंद नारंग न सिर्फ उर्दू भाषा में भारत का प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार जीत चुके हैं बल्कि साहित्य अकादमी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं.
दिल्ली के सेंट स्टीवंस कॉलेज से अध्यापन की शुरुआत करने वाले नारंग देश-विदेश के कई विश्वविद्यालयों में उर्दू पढ़ा चुके हैं. गोपीचंद इस बात का हमेशा से विरोध करते आए हैं कि उर्दू को किसी धर्म विशेष से जोड़ कर देखा जाए.
उर्दू के विकास में कई हिंदू लेखकों का योगदान रहा है. वह चाहे शाहजहाँ के जमाने के चंदरभान ब्राहमण रहे हों या नामी लेखक चकबस्त या फिर फिराक गोरखपुरी, कृष्ण चंदर, प्रेम चंद और गोपीचंद नारंग- इन सबने उर्दू भाषा के फलने फूलने में खासा योगदान दिया है.
गोपीचंद नारंग की करीब 57 पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं. इनमें से अधिकतर उर्दू में हैं. उन्होंने कुछ किताबें हिंदी और अंग्रेजी में भी लिखी हैं. वह उर्दू के अलावा छह अन्य भारतीय भाषाएं भी जानते हैं.लेखक के अलावा नारंग बहुत अच्छे वक्ता भी हैं.
उनकी कुछ प्रमुख रचनाओं में उर्दू अफ़साना रवायात और मसायल, इकबाल का फ़न,अमीर ख़ुसरो का हिंदवी कलाम, जदीदियत के बाद शामिल हैं.
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दिल्ली के सेंट स्टीवंस कॉलेज से अध्यापन की शुरुआत करने वाले नारंग देश-विदेश के कई विश्वविद्यालयों में उर्दू पढ़ा चुके हैं. गोपीचंद इस बात का हमेशा से विरोध करते आए हैं कि उर्दू को किसी धर्म विशेष से जोड़ कर देखा जाए.
उर्दू के विकास में कई हिंदू लेखकों का योगदान रहा है. वह चाहे शाहजहाँ के जमाने के चंदरभान ब्राहमण रहे हों या नामी लेखक चकबस्त या फिर फिराक गोरखपुरी, कृष्ण चंदर, प्रेम चंद और गोपीचंद नारंग- इन सबने उर्दू भाषा के फलने फूलने में खासा योगदान दिया है.
गोपीचंद नारंग की करीब 57 पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं. इनमें से अधिकतर उर्दू में हैं. उन्होंने कुछ किताबें हिंदी और अंग्रेजी में भी लिखी हैं. वह उर्दू के अलावा छह अन्य भारतीय भाषाएं भी जानते हैं.लेखक के अलावा नारंग बहुत अच्छे वक्ता भी हैं.
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