Friday, 14 December 2012

**बाबा साहब डा. अम्बेडकर और इस्लाम**

**बाबा साहब डा. अम्बेडकर और इस्लाम**
मूल रूप से पशु और मनुष्य में यही विशेष अन्तर है कि पशु अपने विकास की बात नहीं सोच सकता, मनुष्य सोच सकता है और अपना विकास कर सकता है।
हिन्दू धर्म ने दलित वर्ग को पशुओं से भी बदतर स्थिति में पहुँचा दिया है

, यही कारण है कि वह अपनी स्थिति परिवर्तन के लिए पूरी तरह कोशिश नहीं कर पा रहा है, हां, पशुओं की तरह ही वह अच्छे चारे की खोज में तो लगा है लेकिन अपनी मानसिक गुलामी दूर करने के अपने महान उद्देश्य को गम्भीरता से नहीं ले रहा है।


मुसलमानों द्वारा दलितों की सहायता
दूसरी तरफ़ आम मुसलमानों ने मानवी आधार पर अछूतों की सदा ही कुछ न कुछ मदद की है। जब धर्म परिवर्तन करने की कोई भी बात न थी तब भी मुसलमानों ने अछूतों की मदद की। महाद तालाब के आंदोलन में जब हिन्दुओं ने अछूतों को बेरहमी से मारा तब अछूतों ने मुसलमानों के ही घरों में शरण ली थी। जब महाद तालाब का जल पीने के लिए दुबारा आंदोलन करने के लिए पंडाल के लिए किसी भी हिन्दू ने जगह नहीं दी थी तब मुसलमानों ने ही जगह दी थी।
(पृष्ठ 74.75 जीवन संघर्ष )
बाबा साहब ने सिद्धार्थ कालेज की स्थापना की तो इसके निर्माण के लिए बम्बई के मुसलमान सेठ हुसैन जी भाई लाल जी ने 50 हज़ार रुपया चंदा दिया और सर काउसजी जहांगीर ने भी सहयोग प्रदान किया किन्तु सखेद कहना पड़ता है कि श्री गोविन्द मालवीय जी ने इसकी कटु आलोचना की।
(125 जीवन संघर्ष, लेखक जिज्ञासू)

http://islaminhindi.blogspot.in/2010/03/research-book.html

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