किसी भी कौम की तरक्की या पिछड़ेपन की अहम वजह
तालीम होती है और ये सच है कि भारत के बँटवारे के वक्त भारत में वही
मुस्लिम रह गए थे जो या तो नवाब थे या मजदूर और ये एक अहम वजह थी जिसकी वजह
से भारत का मुस्लिम गरीब और सरकारी नौकरियों से दूर होता चला गया मगर
मुस्लिमो ने 1980 के दौर के बाद एक बार फिर से तालीम की तरफ रुख करना शुरू
किया तो तब तक मुस्लिमो के साथ भेदभाव अपने चरम पर पहुँच चूका था इसीलिये
हुकूमत
के हर शोबे में मुस्लिमो को नज़र
अंदाज़ किया जाने लगा और हुकूमतों की इसी नज़र अंदाजी ने मुस्लिमों की सरकारी
नौकरियों में भागेदारी 36% से घटाकर 0.3% कर दी I
इस महाज़ का मकसद तो मुझे नहीं पता क्या है लेकिन अगर इस महाज़ के जरिये कुछ आला दर्जे के स्कूल बनाए जाए जिनमे आला दर्जे की तालीम मुहैय्या कराई जाए जिससे कि मुस्लिमो में तालीम ज्यादा से ज्यादा पहुंचाई जा सके तो बेहतर होगा और इस काम के लिए दौलतमन्द मुस्लिमो से पैसा लिया जा सकता है और सबसे पहले मैं जिस लायक भी हूँ उतना पैसा देने के लिए तैयार हूँ और अगर संस्था के स्कूल बनेंगे तो उनमे मुस्लिमो को मुलाजमत के मौके भी मिलेंगे यानि बच्चों की तालीम और बड़ों को रोज़गार I
इस महाज़ को एक संस्था की शक्ल देकर अलग अलग सूबों के अलग अलग शहरों में इस संस्था के स्कूल बनाए जाएँ तो ये सबसे बेहतर काम होगा वरना फेसबुक या गली चौराहों पर खाली बातें करना बेमानी होगा I
M Shahid Guddu
इस महाज़ का मकसद तो मुझे नहीं पता क्या है लेकिन अगर इस महाज़ के जरिये कुछ आला दर्जे के स्कूल बनाए जाए जिनमे आला दर्जे की तालीम मुहैय्या कराई जाए जिससे कि मुस्लिमो में तालीम ज्यादा से ज्यादा पहुंचाई जा सके तो बेहतर होगा और इस काम के लिए दौलतमन्द मुस्लिमो से पैसा लिया जा सकता है और सबसे पहले मैं जिस लायक भी हूँ उतना पैसा देने के लिए तैयार हूँ और अगर संस्था के स्कूल बनेंगे तो उनमे मुस्लिमो को मुलाजमत के मौके भी मिलेंगे यानि बच्चों की तालीम और बड़ों को रोज़गार I
इस महाज़ को एक संस्था की शक्ल देकर अलग अलग सूबों के अलग अलग शहरों में इस संस्था के स्कूल बनाए जाएँ तो ये सबसे बेहतर काम होगा वरना फेसबुक या गली चौराहों पर खाली बातें करना बेमानी होगा I
M Shahid Guddu
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